देश के हालात (अधिकार और कर्तव्य)बदले हैं हालात देश के, बदली नई बयार है,पर अब भी कुछ उलझनों में फंसा हमारा संसार है।हर नुक्कड़ पर छिड़ी बहस है, हर कोई चिल्लाता है,अपने अधिकारों की खातिर हर कोई हाथ उठाता है।पर भूल गए हम सब वो जिम्मेदारी जो अपनी थी,वो राष्ट्र-न...