कूड़ेदान में पड़ी एक किताब मुझे देखकर मुस्कराईमैने अचंभे से पूछा अरे बहुत दिन बाद दी हो दिखाईये क्या हुआ तुम आज पड़ी हो इस कूड़ेदान मेंकभी तो हम सब सर झुकाते थे तुम्हारे सम्मान मेंऐसा क्या हुआ है जरा अपनी आप बीती तो सुनाओकिताब बोली आशुतोष पहले मुझे हांथ देकर ऊ...