कूड़ेदान में किताब

कूड़ेदान में किताब

आशुतोष गुप्ता
Connecting to Wreadom...

About this book

कूड़ेदान में पड़ी एक किताब मुझे देखकर मुस्कराईमैने अचंभे से पूछा अरे बहुत दिन बाद दी हो दिखाईये क्या हुआ तुम आज पड़ी हो इस कूड़ेदान मेंकभी तो हम सब सर झुकाते थे तुम्हारे सम्मान मेंऐसा क्या हुआ है जरा अपनी आप बीती तो सुनाओकिताब बोली आशुतोष पहले मुझे हांथ देकर ऊ...