एक इम्तेहान जिंदगी

एक इम्तेहान जिंदगी

P
Pooja goyal
Connecting to Wreadom...

About this book

ज़िंदगी ने हर मोड़ पर परखा मुझे,कभी अपनों से, कभी सपनों से।मैं हर बार थोड़ा टूटी ज़रूर,पर खत्म कभी नहीं हुई।अब समझ आया—इम्तेहान कागज़ों का नहीं था,हिम्मत का था…और मैं अभी भी जवाब लिख रही हूं,कुछ खुद में ढूंढ रही हु कुछ सवाल कर रही हूं,जाने कब किस डगर पर मुझे म...