पिता की डायरी

पिता की डायरी

कुंदन राज दत्ता "निश्छल"
Connecting to Wreadom...

About this book

*पिता की डायरी*पुरानी अलमारी के कोने में धूल से ढकी एक डायरी थी,उसके पास रखी एक घड़ी और जूतों की जोड़ी भी न्यारी थी।मैंने जब धीरे से उसके पन्ने पलटने शुरू किए,पिता के अनकहे संघर्ष मेरे सामने जीवित हुए।हर पन्ने पर जिम्मेदारियों की स्याही बिखरी थी,हर शब्द में त्...