दीवार पर लगी हुई घड़ी रात के दो बजे का समय बता रही थी, इस वक़्त तक लगभग सारा शहर नींद की आगोश में जा चुका था, पर एक जोड़ी आँखे जिनका नींद और थकान से कोई वास्ता नही था वो अभी भी अपने कमरे की बॉल्कनी से बाहर शहर की चकाचौंध में न जाने क्या तलाश रही थी, वो शून्य में...