शाम का वक्त था अंधेरा गहराने लगा था समन्दर के किनारे पर एक चट्टान पर बैठा मैं लहरों को देख रहा था सोच रहा था , कि क्या करूं जिंदगी ने ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा किया है जहां से वापस लौटा तो असफलताओं की बदनामी मिलेगी , नही लौटा तो कायर कहलाऊंगा । जी तो करता है कि...