khawab

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aditie
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About this book

नींद नहीं आती जब ख्वाब बुनती हूंनींद नहीं आती जब ख्वाब बुनती हूं,चांदनी रातों में चुपचाप सुनती हूं।हवा के हर झोंके में बातें छुपी हैं,तारों की आँखों में यादें बसी हैं।सोचों के धागों में सपने पिरोती,दिल की गहराइयों से चाहत संजोती।खामोश लम्हों में कुछ गीत गूंजते...