आइना टूटा हुआ

आइना टूटा हुआ

आशुतोष गुप्ता
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About this book

एक कोने में पड़ा है आइना टूटा हुआ वक्त का मारा हुआ है आइना टूटा हुआ देखकर बिखराव अपने दिलका शायद इसलिएकुछ नहीं अब बोलता है आइना टूटा हुआ कितने टुकड़ों में बंटा है दिल हमारा दोस्तोदर हकीकत जानता है आइना टूटा हुआ दूरियाँ कितनी बढ़ी हैं जानने के वास्तेदिल हमारा चाह...