आम और बचपन

आम और बचपन

कुंदन राज दत्ता "निश्छल"
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About this book

*आम और बचपन*गर्मी की छुट्टियों का वह प्यारा ज़माना,आमों की खुशबू और बचपन का तराना।न चिंता थी कल की, न कोई सवाल था,हर दिन खुशियों से भरा एक कमाल था।आँगन में दोस्तों का लगता था मेला,हँसी-ठिठोली में कटता था हर बेला।पेड़ों की छाँव तले बैठते थे हम,आमों की बातों में...