इंतज़ार उस लम्हें का...धड़कनों में थमी सी एक हलचल है,किताबों में सिमटी जैसे कोई ग़ज़ल है।अधूरी ख़्वाहिशों का बहता हुआ चश्मा,और यादों का फैला ये मखमली मख़्मल है।पलकें बिछी हैं राहों में हर सुबह-ओ-शाम,हवाओं ने भी बुना है चुपके से तेरा नाम।इस ख़ामोशी को अब एक न...