पिता की धरोहर

पिता की धरोहर

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Gunjan Johari
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About this book

अलमारी के एक कोने से, जब धूल को मैंने हटाया था,सालों पुराना इक किस्सा, मेरे हाथों में मुस्काया था,,वो धुंधली सी इक डायरी थी, जिसमें कुछ पन्ने कोरे थे,कुछ पन्नों पर लिखे पिता ने, अपने सुख-दुख थोड़े थे,,उस डायरी के हर पन्ने पर, संघर्षों की स्याही थी,...