सांझ ढली पर तुम ना आयेअयसन में मन मोरा घबरायेघड़कन चिरकुट चिरकुट बोलेनयनन फफक फफक के रोलेचितवन ईतवन ऊतवन डोलेफिर भी नटवर गिरह ना खोलेअब तो मनुवा तुम ही बताओ तुम ही विरह की गिरह खुलवाओसुना है तुम हो गजब के ओझामिटाई दो हमरे मनयी का बोझाअबई ना सहन हो विरह की पीड़...