हमने रात को जगाए रखा, अरमानों के खंजर को दिल में चुभाए रखा,। मलाल ये रहा कि दर्द का आलम सबसे छुपाएं रखा, ओर उस जालिम ने तो नजर उठा के देखा भी नहीं। कमबख्त रेत की तरह दिल में हमको दबाए रखा।।