देश के हालात

देश के हालात

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Sumit Menaria
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About this book

दिन का सोचा था आ गई है रात,क्या हो गए हैं देखो देश के हालात।पेपर लीक हो रहे हैं जैसे पानी की टंकी,मगर कोई नहीं कर रहा है इस पर बात।मासूम बेटियां बेखौफ़ घर से निकलें कैसे,दरिंदे लगाए बैठे हैं रस्ते पर घात।प्रेमी संग पहाड़ों से धकेले जा रहे हैं मासूम,सात छोड़ो अ...