टूटन

टूटन

M
Manoj Kumar “MJ”
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About this book

टूट जा रहा हूँ हर इक साँस पर,खरोंच आ गई है मेरी ख़राश पर।आदमी हूँ, आदमी का दिल है मिलाआ गया है जो किसी की लाश पर।खून पी गए जो बिना खबर किए,पानी की बारी, आ गए जात पर।उजाले दिन के गर्त में सौंप दिए,तोहमतें बरपा दी सारी रात पर।बेहया एबिस हमीं दोज़ख़ के वाशिंदे,ज...