शाम की फुर्सत

शाम की फुर्सत

कुंदन राज दत्ता "निश्छल"
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About this book

*शाम की फुर्सत*दिन भर की भागदौड़ के बाद जब शाम उतर आती है,तेरी यादों की खुशबू हवाओं में बिखर जाती है।सूरज की आखिरी किरण जब गालों को छूती है,मेरे दिल की हर धड़कन बस तेरा नाम कहती है।थकी हुई निगाहों को तेरा चेहरा सुकून देता है,जैसे सूखे मौसम को सावन का जुनून देत...