"मेरी पहचान "मैं नीर हूँ, बहना मेरी फ़ितरत है,शब्दों में ढलना मेरी आदत है।मेरी पहचान किसी नाम की मोहताज नहीं,मेरी लेखनी ही मेरी असली इबारत है।कभी अश्क बनकर काग़ज़ पर उतर जाती हूँ,कभी नदी-सी भावों में बिखर जाती हूँ।जो पढ़ ले मेरे शब्दों की गहराई को,मैं उसी के द...