dhokha

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A
aditie
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About this book

किस पर खफा हो खुद पर या उस परक्यों नाराज हो क्यों जान जलाते हो जब जानते हो ये सच नहीं तो क्यों बार बार आंसू बहाते होवो नहीं है तुम्हारा जिस पर जान लुटाते होइक छलावा है इक धोखा हैक्यों उस पर अरमान जगाते होबस.... बहुत हुआ अबचलो नए अंदाज से दुनिया सजाते है।।