किताब

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आशुतोष गुप्ता
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About this book

तुम्हें पता है मेरा इरादा तुम्हें पाने का नहीं हैबल्कि मेरा इरादा तुम्हें समझने का हैतुम सिर्फ कोई हाड़-मांस का पुतला नहीं होजो तुम्हें पाया जाएबल्कि तुम तो अपने आप में एक पूरी किताब होजिसके पन्नों पर लिखा हैरास्तों का सफ़रसफ़र की थकानथकान की उदासीउदासी में छि...