प्रस्तावना :-हम सब अपनी-अपनी अनकही कहानियों के लेखक हैं। कुछ पन्ने हम रोज़ जीते हैं, और कुछ पन्नों पर आकर हम ठहर जाते हैं।पर क्या कभी आपने सोचा है कि जब एक लेखक अपनी कलम से किसी पात्र को जन्म देता है, तो क्या वह पात्र केवल कागज़ का एक टुकड़ा बनकर रह जाता है? य...