रिश्तों का सफ़र अक्सर एक ऐसी पगडंडी है,जहाँ पैरों में छाले भी पड़ते हैं,और उसी राह पर कहीं ठंडी छाँव भी मिलती है।हम ताउम्र एक तराजू हाथ में लिए घूमते हैं,तौलते रहते हैं—किसने कितना कहा, किसने कितना सहा,कौन अपनी जगह सही था और कौन पूरी तरह गलत।मगर सच तो यह है कि र...