रिश्तों की अनकही धूप-छाँव

रिश्तों की अनकही धूप-छाँव

G
Ghayal's Daughter
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About this book

रिश्तों का सफ़र अक्सर एक ऐसी पगडंडी है,जहाँ पैरों में छाले भी पड़ते हैं,और उसी राह पर कहीं ठंडी छाँव भी मिलती है।हम ताउम्र एक तराजू हाथ में लिए घूमते हैं,तौलते रहते हैं—किसने कितना कहा, किसने कितना सहा,कौन अपनी जगह सही था और कौन पूरी तरह गलत।मगर सच तो यह है कि र...