क्या तेरा नाम लिखूं

क्या तेरा नाम लिखूं

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CHANDER MITTAL
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About this book

क्या तेरा नाम लिखूं सोचता हूँ तेरा नाम अरमान लिखूँ,तू मेरे दिल की ख़्वाहिश है, तू ख़ुदा का है पैग़ाम लिखूँ!या फिर तेरा नाम गुलिस्ताँ लिखूँ,महक उठा मेरा तन-मन तेरे तसव्वुर से...सोचता हूँ तुझे अपनी रूह का मुक़ाम लिखूँ।नहीं, मैं तेरा नाम ईमान लिखूँ!झुके जो सर मेरा ख़ुदा के सजदे में कहीं,उस बंदगी में भी...