क्या तेरा नाम लिखूं सोचता हूँ तेरा नाम अरमान लिखूँ,तू मेरे दिल की ख़्वाहिश है, तू ख़ुदा का है पैग़ाम लिखूँ!या फिर तेरा नाम गुलिस्ताँ लिखूँ,महक उठा मेरा तन-मन तेरे तसव्वुर से...सोचता हूँ तुझे अपनी रूह का मुक़ाम लिखूँ।नहीं, मैं तेरा नाम ईमान लिखूँ!झुके जो सर मेरा ख़ुदा के सजदे में कहीं,उस बंदगी में भी...