शीर्षक: अक्स-ए-किरदारन किसी नाम की हसरत, न रुतबे की चाहत है,मेरे वजूद में बस सुकूँ-ए-इबादत है।चमकती दुनिया के शोर से मैं कोसों दूर हूँ,मुझे तो अपनी तन्हाई से ही मोहब्बत है।ज़माने की नज़रों में मैं महज़ एक उस्ताद हूँ,मगर सच तो ये है कि मैं खुद से आज़ाद हूँ।कि...