इंतज़ार उस लम्हें का

इंतज़ार उस लम्हें का

कुंदन राज दत्ता "निश्छल"
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About this book

*इंतज़ार उस लम्हें का*एक लंबे अरसे से बस तेरा ही इंतज़ार है,हर धड़कन को तेरे आने का ऐतबार है।सुबह की पहली किरण तेरा नाम लिखती है,हर शाम तेरी यादों का पैगाम रखती है।चाँद से पूछता हूँ, कब तुझे मेरे पास लाएगा,ये अधूरा इश्क़ कब अपना मुकाम पाएगा।तेरे बिना हर मौसम क...