कुकड़ू कु

कुकड़ू कु

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Ritesh Burnwal
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About this book

उसका असली नाम तो वैसे कविता था, लेकिन सब उसे प्यार से कुक्कू बुलाते थे। और मैं? मैं उसे 'कुकड़ू-कू' कहता था। कोई और लड़की होती तो शायद मुंह फुला लेती, बात करना बंद कर देती पर वो? वो कभी चिढ़ती नहीं थी। बस अपनी वो बड़ी-बड़ी आँखें चमकाकर हंसती रहती थी। उसकी हंसी...