सफ़र का हमसफ़र: "एक फ़ौजी"

सफ़र का हमसफ़र: "एक फ़ौजी"

A
Ashutosh Rajauria
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About this book

सफ़र का हमसफ़र: "एक फ़ौजी"​खिड़की वाली सीट पर बैठा, एक मुसाफ़िर शांत और गंभीर था,हरे रंग की वर्दी पहने, वो भारत मां का सच्चा वीर था।सफ़र शुरू हुआ तो बस यूं ही, नजरों से नजरें मिलीं हमारी,मुस्कुराकर उसने हाथ बढ़ाया, और शुरू हुई बातों की बारी।​घर से दूर वतन की खात...