दो

दो

मनु
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About this book

चलो फिर से जंग करते हैंअधरो पे अधरो को धरते हैंबहुत हो चुका बाबू सोनाठंडी बहुत है कंबल दो नाएक कंबल तुम भी ले लोज्यादा पब्जी अब मत खेलोरात ठिठुरन वाली हैऔर पास मे घरवाली हैआओ वैसी बाते करेरंगीन ठंडी राते करेसुबह जब सूरज आयेगानया सवेरा लायेगातब तुम मुझे निहारना...