चलो फिर से जंग करते हैंअधरो पे अधरो को धरते हैंबहुत हो चुका बाबू सोनाठंडी बहुत है कंबल दो नाएक कंबल तुम भी ले लोज्यादा पब्जी अब मत खेलोरात ठिठुरन वाली हैऔर पास मे घरवाली हैआओ वैसी बाते करेरंगीन ठंडी राते करेसुबह जब सूरज आयेगानया सवेरा लायेगातब तुम मुझे निहारना...