तो प्रश्न यह है कि जब मृत्यु ही है अंतिम, तो प्रथमतः जीवन क्यों है?जब खोना-पाना ही जीवन का पर्याय है, तो अश्रु क्यों हैं?भावों के इस आवेग में, जीवन के इस हाहाकार में, मृत्यु के विचार में–एक डर है, बड़ी बेचैनी है, घबराहट है।आस-पास छल है, और उस छल में भी न जाने...