मैं केवल देह नहीं हूँ,नश्वर काया का क्षणिक आकार नहीं,मैं वह चेतना हूँजो समय के प्रवाह में भीस्वयं को खोजती रहती है।जब दिशाएँ मौन हो जाती हैं,और भीड़ में पहचान धुँधली पड़ जाती है,तब भीतर कहींएक सूक्ष्म स्वर कहता है,“तुम्हारा होना ही तुम्हारा प्रमाण है।”अस्तित्व कोई शब्द नहीं,यह अग्नि है अंतर्मन की,जो...