निशान

निशान

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Arun Pratap Singh
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About this book

छू लो मुझे फिर एक दफा मोहब्बत से,इस बेजान लाश में थोड़ी जान डाल दो । कोई और कभी हक ही न जता सके अपना मुझपर,मेरे जिस्म से लेकर रूह तक अपने निशान डाल दो । ✍️ अरुण प्रताप सिंह "आर्या"