छू लो मुझे फिर एक दफा मोहब्बत से,इस बेजान लाश में थोड़ी जान डाल दो । कोई और कभी हक ही न जता सके अपना मुझपर,मेरे जिस्म से लेकर रूह तक अपने निशान डाल दो । ✍️ अरुण प्रताप सिंह "आर्या"