घड़ी

घड़ी

V
Vishakha Dwivedi
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About this book

हर घड़ी यादों का एक बवंडर जाने क्यों मुझे घेरे बैठा है...वो राहें, वो यादें, वो वादे,वो सपने, सब कुछ मुझे छूटा हुआ सा क्यों लगता है...हर घड़ी यादों का...वो मंजर, वो खंजर वो सुनसान सड़क जहां सब कुछ एक साथ खुद में टूटा हुआ सा क्यों लगता है हर घड़ी यादों का...जीवन की गति और विसंगतियों से मन येअब सब कुछ...