हर घड़ी यादों का एक बवंडर जाने क्यों मुझे घेरे बैठा है...वो राहें, वो यादें, वो वादे,वो सपने, सब कुछ मुझे छूटा हुआ सा क्यों लगता है...हर घड़ी यादों का...वो मंजर, वो खंजर वो सुनसान सड़क जहां सब कुछ एक साथ खुद में टूटा हुआ सा क्यों लगता है हर घड़ी यादों का...जीवन की गति और विसंगतियों से मन येअब सब कुछ...