विमुक्ति....

विमुक्ति....

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Riya Pandey
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About this book

प्रतीक्षा की चौखटें सदैव बचेंगी,प्रतीक्षा की खोह में खो जाने से,दुःख सदा सशंकित रहा है,अपने दामन में दुःख प्रक्षालन से,अंधेरा किसी दरार से सांसें ले रहा है,उजाला भी आंखें मूंदना चाहता है,कि सब ख़ुद से दूर जाते हैं,मोक्ष भी मोक्ष खोजना चाहता है,प्रेम ने सब-कुछ...