"जंग "

"जंग "

A
Ashutosh Rajauria
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About this book

" जंग "न किसी से गिला न किसी से द्वेष है , मेरी ही रणभूमि है मेरी मुझसे ही जंग है ,न इसमें तलवारें हैं औऱ न ही है बंदूकें ,ये तो बस अंतर्द्वंद्व है महज़ विचारों की ज़ंग है ।....आशुतोष राजौरिया