हृदय की व्यथा अब व्यक्त न होती,मौन धारण करके इन अधरों को सिल लिया,मोह-माया का परदा नयनों से हटा जब,प्रेम पाने की चाह में वैराग्य मिल गया ।आर्या ✍️