एक

एक

मनु
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About this book

लिखने को तो बहुत कुछ है पर मन नही हैं लिखने का इन दो कौडी के अखबारो में चंद रुपयो के लिए बिकने आगे तुमसे क्या कहूं तुम खुद ही समझदार हो मनु हम तो अभी बच्चे हैं हमे तुम से बहुत कुछ है सिखने का मनु