एक शख्स मुझमें बेबस सा

एक शख्स मुझमें बेबस सा

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Arun pratap Singh
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About this book

तुझें ऐतबार नही है अभी मुझपऱ,मेरे अंदर भी दर्द का इक सैलाब नज़र आएगा ।कभी गौर फ़रमाना तू इक दफ़ा मेरी सीरत पर,एक शख़्स मुझमें बेबस सा बेताब नज़र आएगा ।तुम चाहों जो तो कर दो मुक़म्मल अहसास सारे,"आर्या" तुझपर यूं ही ख़ुशी ख़ुशी मर जाएगा ।माना कि अभी गर्दिश में है थोड़ा म...