रात कट जाती है

रात कट जाती है

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Arun Pratap Singh
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About this book

यू ही नहीं कभी आँखों में रात कट जाती है,यू ही नहीं रहते हैं आज़कल हम बेचैन से ।कुछ बेचैन सा करता है रातों में, बीते पलों की याद जीने कहाँ देती है चैन से । ✍️ अरुण प्रताप सिंह "आर्या"