अफ़सोस बस इतना ही रहा जिंदगी में,कि ख़्वाबो का आशियाना मुकम्मल हो न सका । मीलों चला था जो तलाश में मेरी, बस चार कदम और न चल सका । शायद मेरी ही मोहब्बत में रही होगी कुछ कमी, तभी तो वो मेरा होकर भी मेरा हो न सका । माँगता हूँ उसे आज भी रब से हर पल,बस इक दफा उसका...