बिखरे न हो जब हम अंदर से परवाज़ नही निकलते ....टूटा न हो दिल जब तक पूरी तरहशायरी के अल्फ़ाज़ नही निकलते .!.!.! ✍️ अरुण प्रताप सिंह "आर्या"