" ख़ामोश मुसाफिर "

" ख़ामोश मुसाफिर "

A
Ashutosh Rajauria
Connecting to Wreadom...

About this book

शीर्षक: खामोश मुसाफ़िर​वो अपनी ज़िम्मेदारी इस तरह निभाता है,बिना कहे ही वो हर एक दर्द सह जाता है।​न कोई शिकवा लबों पर, न आँख में आँसू,वो खामोशी से वफ़ा का चराग़ जलाता है।​अपनों की आँखों में सजे हैं जो हसीं ख्वाब,वो दिन-रात बस उन्हीं को हक़ीक़त बनाता है।​थक जात...