शीर्षक: खामोश मुसाफ़िरवो अपनी ज़िम्मेदारी इस तरह निभाता है,बिना कहे ही वो हर एक दर्द सह जाता है।न कोई शिकवा लबों पर, न आँख में आँसू,वो खामोशी से वफ़ा का चराग़ जलाता है।अपनों की आँखों में सजे हैं जो हसीं ख्वाब,वो दिन-रात बस उन्हीं को हक़ीक़त बनाता है।थक जात...