हमको तुम पसंद हो पर साथी नहीं

हमको तुम पसंद हो पर साथी नहीं

कुंदन राज दत्ता "निश्छल"
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About this book

*हमको तुम पसंद हो पर साथी नहीं*हमको तुम पसंद हो, पर साथी नहीं,यही सच था तुम्हारा, कोई कहानी नहीं।मैंने तो तुम्हें अपनी दुनिया मान लिया,तुमने मुझे बस एक राहगीर जान लिया।तेरी हर मुस्कान में अपना सवेरा देखा,तेरे हर ख़्वाब में मैंने बसेरा देखा।दिल ने तुझे अपनी धड़...