"इंतज़ार उस लम्हे का (एक सैनिक की दास्तां)" ....वतन की राह में अपनी जवानी छोड़ आए हैं,पीछे अपना वो पूरा घर-आंगन छोड़ आए हैं।मगर इस खाकी वर्दी में भी एक इंसान रहता है,जो सरहद की कड़कती बर्फ़ में भी दर्द सहता है।इंतज़ार है मुझे बस उसी एक सुनहरी घड़ी का,जो सिरा...