मैं जोगन हो जाती हूँ...

मैं जोगन हो जाती हूँ...

श्वेता सागर
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About this book

जब तुम कॉल करते होया मैसेज,"क्या कर रहे हो?"-तुम्हारा सवाल आता हैऔर मैं झट से कहती हूं,"कुछ नहीं!""कोई इतना ख़ाली कैसे हो सकता है?"तुम्हारा अगला सवालऔर मेरी नज़र घूम आती है...कभी दरवाज़े के पास, हड़बड़ी में छोड़ी गई झाड़ू पर।कभी कमरें के बीच में पड़े बिखरे कूड...