डर की कब्ज

डर की कब्ज

मनु
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About this book

जी करता हैं तेरे शहर में मकान ले लूंबुर्का पहनकर तेरे बच्चो के साथ खेलूंतेरे अब्बा तेरी अम्मी और तेरी बेगममौका मिलते कर दूं इनके नाक में दमऔर क्या करु इससे ज्यादा ऐ सनमकुछ तू भी मिटा दे शर्मो हया बे-शरमकब तक मैं ही अंगारो पर चलती रहूंकब तक मैं ही मजारो पर चढती...