आम और बचपन: "यादें गाँव की" गर्मी की उन छुट्टियों का, वो मंज़र याद आता है,गाँव का वो पुराना घर, वो आँगन याद आता है।शहर की इस चकाचौंध में, वो सादगी कहाँ मिलती,जहाँ अपनों के साए में, हर एक धड़कन थी खिलती।मैं जब भी गाँव जाता था, तो सबका प्यारा था मैं,मोहब्बत स...