प्रेमरंग

प्रेमरंग

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Sumit Menaria
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About this book

'इन टपकते आंसुओं का दोष मैं किसको दूँ? दिल में उठते इस दर्द का जिम्मेदार मैं किसे ठहराऊं? किसे मैं बेवफा कहूँ, अपनी इस हालत का दोषी मैं किसको बताऊँ? किसकी मैं कहूँ कि गलती है? किसके नाम मैं यह दगा लिखवाऊँ?बाहर होती यह बरसात आज मुझे अच्छी नहीं लग रही है। यह मेर...