मैं निकली हूँ स्वयं की खोज में मुझे नहीं पता किधर है जाना,पर विश्वास मुझे है इतना मैं पा लूॅंगी इक दिन वो ठिकाना।मेरे निज स्वरूप से मुझको है मिलकर अब हाथ मिलाना,इंतज़ार उस लम्हें का ये मेरा बरसों से है बहुत पुराना।मुझे प्यार बहुत है शब्दों से मेरे पास है शब्दो...