तुम्हें बुलाना,पुनः लौट आना,नया परिवर्तन तो नहीं,निरर्थक जतन तो नहीं,तुम्हारे जाने से पूर्व,लौटने की राह बुहारी गई है,मुझसे बहुत पहले भी,कई आवाज़ें पुकारी गई हैं,कि जाने देना भी लौटने की कला है,झरती निबौलियों से,जीवन अंकुरित होता है,कि जैसे खंडहर होने के बाद भ...