साथ

साथ

भारती भानु
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About this book

सबके साथ बैठते हो अपनें साथ कभी बैठा करों सबसे बात करतें हों अपनें साथ कभी बातें किया करों मरने की, उदासी की, उलझन की नहीं खुद से प्यारी प्यारी बातें किया करों कितना कुछ हैं तुम में अच्छा खुद को ये बताया करों मान मनुहार की जरूरत लगे तो खुद को भी मनाया करों तुम...