उससे रिश्ता बिगाड़ बैठा हूँ अपनी दुनिया उजाड़ बैठा हूँजिसको मंज़िल समझ के जीता थाउस से दामन ही झाड़ बैठा हूँ जिसको सींचा था प्यार से मैंने वो शजर भी उखाड़ बैठा हूँ अब ज़रूरत नहीं मुझे उसकीख़्वाहिशें सब पछाड़ बैठा...